मृगतृष्णा


मृगतृष्णा ही जीवन है,
मृगतृष्णा ही गति है.
यूँ तो ज़िंदगी की सारी बातें ही,
झूटी है.

तुम क्यो करते हो वक़्त बर्बाद ,
चीज़ो को,
सच और झूट साबित करने मे.

मृग की प्यास तो वैसे भी कभी,
नही बुझेगी.
लेकिन जीवन का आधार ही,
गति है.
चाहे हो वो पानी के लिए,
हो या,
पानी के आभास के लिए हो.

तुम भी तो कई धोखो मे,
रहते हो.
तो क्यो अपने सपनो को,
मृगतृष्णा का नाम देते हो.
तुम भी उन रेत पे चमकती बूँदो के लिए,
भागो.
अपने लिए ना सही तो,
मृग के लिए ही सही.

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